तट पर बैठो सुनो जरा ,
हर नदिया कुछ गाती है ।
कल कल करती जल की धारा
रुक कर ये एक बात बताती है।
हर नदिया कुछ गाती है ।
कल कल करती जल की धारा
रुक कर ये एक बात बताती है।
तट पर बैठो सुनो जरा
हर नदिया कुछ गाती है ।
हर नदिया कुछ गाती है ।
निर्मल मन रख जब करना तुम ,
अर्पण हो या तर्पंण शांति लाती है।
तट पर बैठो सुनो जरा
हर नदिया कुछ गाती है ।
लहरों में उसके संगीत बसा है।
सदियों से इतिहास दिखाती है ।
तट पर बैठो सुनो जरा
हर नदिया कुछ गाती है ।
हर नदिया कुछ गाती है ।
गंगा, यमुना , गोदावरी ,नर्मदा,
अपने जग में नाम बताती है।
तट पर बैठो सुनो जरा,
हर नदिया कुछ गाती है ।
बैठ किनारे खोलो मन की गाठें ,
दर्शन प्राणिमात्र को सिख़ाती है ।
तट पर बैठो सुनो जरा
हर नदिया कुछ गाती है ।
हर नदिया कुछ गाती है ।
समझ सको तो समझ लो जल का,
जीवन में हमें मोल समझाती है।
तट पर बैठ सुनो जरा,
हर नदिया कुछ गाती है ।

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