क़ानून तेरा
मुझे क्या न्याय देगा ?
खुद करूगी।
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चेहरे ढके
क्या गुनाह छिपेगा ?
धिक्कारते हैं।
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मशालें जलीं
ज्वालामुखी न बनें
हदें जान लो।
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कैद कर दो,
सिफारिशे हो रही
हदें जान लो।
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हमारे लिए
इतिहास की बात
खुद खुदा हैं।
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उड़ाते हैं वे
कीचड हम पर
सने खुद हैं।
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वे चाहते है
हम भटक जाए
इस जंग से .
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इस जंग में
हौसले से लड़ना
जीत हमारी।
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