जीवन के इस मुकाम पर
क्या भूलूं क्या याद करूँ?
कल की बात रही हो जैसे,
आँखों के बिखरे सपनों जैसे,
तैर रहे हैं सब मन दर्पण में,
लौटा दो ये किससे फरियाद करूँ?
समझ नहीं aआता है अब भी,
क्या भूलूं क्या याद करूँ?
मन में छिपा कर रख छोड़ा है,
यादों के तिनके तिनके को
नजर बचा कर झाँक लिया हैं,
क्यों नाहक कोई विवाद करूँ?
क्या भूलूं क्या याद करूँ?
कल की बात रही हो जैसे,
आँखों के बिखरे सपनों जैसे,
तैर रहे हैं सब मन दर्पण में,
लौटा दो ये किससे फरियाद करूँ?
समझ नहीं aआता है अब भी,
क्या भूलूं क्या याद करूँ?
मन में छिपा कर रख छोड़ा है,
यादों के तिनके तिनके को
नजर बचा कर झाँक लिया हैं,
क्यों नाहक कोई विवाद करूँ?
जीवन तो गुज़रा है झूले में,
क्या भूलूं क्या याद करूँ?
आँखों के सुंदर सपनों को
तुमने ही धुंआ धुंआ किया,
किससे पूछूं रास्ता इसका ,
फिर दुनियाँ से जेहाद करूँ?
याद है हर मील का पत्थर
क्या भूलूँ क्या याद करूँ?
यादों के कुछ पैबंद बचे हैं
कुछ उजले कुछ धुंधले से,
गीतों के टुकड़ों में लिखे थे
पर अब कैसा प्रतिवाद करूँ?
जीवन दोराहे पर खड़ा है
क्या भूलूँ क्या याद करूँ?
आँखों के सुंदर सपनों को
तुमने ही धुंआ धुंआ किया,
किससे पूछूं रास्ता इसका ,
फिर दुनियाँ से जेहाद करूँ?
याद है हर मील का पत्थर
क्या भूलूँ क्या याद करूँ?
यादों के कुछ पैबंद बचे हैं
कुछ उजले कुछ धुंधले से,
गीतों के टुकड़ों में लिखे थे
पर अब कैसा प्रतिवाद करूँ?
जीवन दोराहे पर खड़ा है
क्या भूलूँ क्या याद करूँ?


