चिट्ठाजगत www.hamarivani.com
sookhi dharti लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
sookhi dharti लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 20 मई 2010

प्यासी धरती - प्यासे मन!



बंजर धरती 
दरकन माटी की,
दरका देती है
दिल सैकड़ों के.
पर क्या करते?
गर आंसुओं से 
बुझती प्यास 
हर आँख
इतना रोती औ'
नीर बहा देती, 
प्यास से पपड़ाये 
होंठों की प्यास
शीतल कर देती.
मन में उमड़ते 
विचारों के बादल 
इतना बरसाती
आकाश में उठी निगाहों को 
आशा से भर देती,
धरती की ज्वाला 
निर्मल जल से शांत कर देती.
मन के खिलते पुष्पों की
एक बगिया 
इस धरती के आँचल को 
चुपचाप रंगीनी से भर देती. 
ये धरती फिर लहलहाए 
ऐसा कुछ कर देती.
सूखी सूखी सी आँखों में
जीवन के रंग भर देती.