कहर बन कर आया जरूर हूँ ,
विश्व में भी कहलाया क्रूर हूँ ,
जन्म दिया किसने ये प्रश्न है ?
वही जिन्हें अपने पर गुरूर है।
हाँ हर तरफ सबका रोना हूँ।
कहते हैं सभी कोरोना हूँ।
प्रकृति के नियमों को तोड़ कर ,
पर्वतों को मशीनों से जोड़ कर ,
ध्वस्त कर दी रचना धरा की ,
रख दिया धाराओं को मोड़ कर।
हाँ हर तरफ सबका रोना हूँ।
कहते हैं सभी कोरोना हूँ।
कुछ दिनों को बंद प्रदूषण की मार ,
शांत हो वातावरण, हो शोर की हार ,
स्वच्छ हुआ आकाश नील वर्ण का ,
वर्षों बाद देखा है गगन धुंआ के पार।
हाँ हर तरफ सबका रोना हूँ।
कहते हैं सभी कोरोना हूँ।
मकान बन गए घर गुलजार हो ,
नन्हों को मिल गया ममता प्यार हो ,
चेहरे मुस्कराते हैं सभी के आजकल,
बंदिशें भले हो फिर भी ये बहार हो.
हाँ हर तरफ सबका रोना हूँ।
कहते हैं सभी कोरोना हूँ।
विश्व में भी कहलाया क्रूर हूँ ,
जन्म दिया किसने ये प्रश्न है ?
वही जिन्हें अपने पर गुरूर है।
हाँ हर तरफ सबका रोना हूँ।
कहते हैं सभी कोरोना हूँ।
प्रकृति के नियमों को तोड़ कर ,
पर्वतों को मशीनों से जोड़ कर ,
ध्वस्त कर दी रचना धरा की ,
रख दिया धाराओं को मोड़ कर।
हाँ हर तरफ सबका रोना हूँ।
कहते हैं सभी कोरोना हूँ।
कुछ दिनों को बंद प्रदूषण की मार ,
शांत हो वातावरण, हो शोर की हार ,
स्वच्छ हुआ आकाश नील वर्ण का ,
वर्षों बाद देखा है गगन धुंआ के पार।
हाँ हर तरफ सबका रोना हूँ।
कहते हैं सभी कोरोना हूँ।
मकान बन गए घर गुलजार हो ,
नन्हों को मिल गया ममता प्यार हो ,
चेहरे मुस्कराते हैं सभी के आजकल,
बंदिशें भले हो फिर भी ये बहार हो.
हाँ हर तरफ सबका रोना हूँ।
कहते हैं सभी कोरोना हूँ।
