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शनिवार, 28 जुलाई 2012

वो पल !

वो पल मेरे थे,
जिए भी मैंने  ही 
लेकिन 
वो समर्पित थे 
किसी अनजान के लिए 
 कोई रिश्ता नहीं था 
बस इंसानियत का रिश्ता 
देखते रहने का रिश्ता 
फिर उसकी मौत का अहसास 
हिला ही तो गया 
उस हादसे का शिकार देख 
अंतर तक काँप गया।
तप करने लगी 
विनती ईश्वर  से 
वापस कर दो 
वो किसी घर का चिराग है 
किसी माँ  का लाल 
औ 
किसी के मुंह का निवाला है 
किसी का भाई भी होगा 
उसे जीवन दो प्रभु 
चाहे कुछ दिन मेरे जीवन से 
लेकर उसको दे देना। 
उसे जीवन दे देना।
उसे जीवन दे देना।

14 टिप्‍पणियां:

sushmaa kumarri ने कहा…

बहुत प्रेरक और सुंदर अभिव्यक्ति..

Udan Tashtari ने कहा…

हम भी इस प्रार्थना में शामिल है..

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

ओह ...दुखद ...एक प्रार्थना उस ईश्वर से

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (29-07-2012 के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

मेरे साथ प्रार्थना करने के लिए आप सभी को धन्यवाद ! ये निःस्वार्थ प्रार्थना ईश्वर स्वीकार जरूर करता है.

--

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

मार्मिक .... हम भी शामिल हैं प्रार्थना में ॰

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

आमीन !

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

आपकी प्रार्थना में साथ...
आमीन.

vandan gupta ने कहा…

ओह ………बेहद मार्मिक ………हम भी शामिल

Rajesh Kumari ने कहा…

ऐसा निःस्वार्थ प्रेम बहुत कम देखने को मिलता है बहुत उन्नत भाव संजोये हैं रचना में रेखा जी आपको ह्रदय तारों का स्पंदन में भी पढ़ा बहुत पसंद आई आपकी रचनाएं बहुत बधाई

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

किसी और के किसी के लिये
आज कौन व्याकुल होता है
आप हो रही हैं खुदा जानता है
जरूर कुछ तो सोचेगा
और करेगा भी कुछ ना कुछ
उसके लिये जो किसी
का बहुत कुछ है !

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

Rajesh Kumari ने आपकी पोस्ट " वो पल ! " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

ऐसा निःस्वार्थ प्रेम बहुत कम देखने को मिलता है बहुत उन्नत भाव संजोये हैं रचना में रेखा जी आपको ह्रदय तारों का स्पंदन में भी पढ़ा बहुत पसंद आई आपकी रचनाएं बहुत बधाई

सदा ने कहा…

आपकी इस प्रार्थना में हम शामिल हैं ...

रचना ने कहा…

please take my good wishes also