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सोमवार, 23 अगस्त 2010

राखी तो बस राखी है !

ये कविता उन सभी भाइयों के लिए जो इस पर्व को इस पवित्र रिश्ते का साक्षी मानते हैं. 

रंग बिरंगे धागों में
बंधा हुआ संसार 
कहाँ जड़े हैं प्यार के मोतीं
वहाँ मान मनौवल होती है,
बस रिश्ते की डोर बंधी
ये मोहक बंधन होती है.
युग बीते और सदियाँ गुजरीं
राखी तो बस राखी है
जिसने बाँधी और जो बंध जाए
बस उस रिश्ते की थाती है. 
नहीं चाहिए बदले में कुछ
बस दुआएं देती है.
छोटी है तो हाथ शीश पर 
समझ कर अभयदान लेती है.
बड़ी है तो ढेर आशीषे लेकर
भाई को दुआ प्रेम से देती है.

रक्षाबंधन पर सभी लोगों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं !

5 टिप्‍पणियां:

rashmi ravija ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता , रेखा दी,...भाई बहन के निश्छल प्रेम में पगी..आपको भी राखी की शुभकामनाएं

राजेश उत्‍साही ने कहा…

शुभकामनाएं।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना ...रक्षाबंधन की शुभकामनायें

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर रचना जी, रक्षाबंधन की आप को भी हार्दिक शुभकामनाएं !

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

Rekha di ko rakhi ke subh awsar par iss bhai ki aur se bahut bahut pyar aur subh kamnayen..........:)