न जाने क्यों उसने इस मूड पर खड़ा कर दिया ,
बाहर तेज आंधियां हैं और अंदर घना अधेरा है ।
लड़कियाँ हैं हम अपने ही खून से जिसके लिए ,
खोजा है कभी हमने न तेरा है और न मेरा है ।
बाहर तेज आंधियां हैं और अंदर घना अधेरा है ।
लड़कियाँ हैं हम अपने ही खून से जिसके लिए ,
खोजा है कभी हमने न तेरा है और न मेरा है ।
इसे खोला गया कर सब क्यों न देखें ,
इस जिरह और जेहाद से अलग भी नया सवेरा है ।
आसमां के नीचे ही गर धार्मिक है सार्वभौम की रात
फिर तो जरूर ये सारे जहां का ही साझा बसेरा है ।
इन महलों और गाड़ियों को ले जायेंगी ये आधियां ,
गर मुहब्बत है दिल में तो सारा जहां ही तेरा है ।
आसमां के नीचे ही गर धार्मिक है सार्वभौम की रात
फिर तो जरूर ये सारे जहां का ही साझा बसेरा है ।
इन महलों और गाड़ियों को ले जायेंगी ये आधियां ,
गर मुहब्बत है दिल में तो सारा जहां ही तेरा है ।