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रविवार, 9 अक्तूबर 2022

एलेक्सा!

एलेक्सा!

हाँ वह एलेक्सा है,
आज की नहीं
बल्कि वह तो वर्षों से है।
वह एलेक्सा पैदा नहीं हुई थी,
माँ की मुनिया,
बापू की दुलारी,
विदा हुई जब इस घर से,
तब पैदा हुई एलेक्सा।
और फिर वही बनी रही, 
उसको किसी मशीन में नहीं 
बल्कि मशीन ही बना दिया
और 
वह एक जगह नहीं
जगह जगह दौड़ती रहती है।
एक नहीं कई थे आदेश देने वाले,
वह रोबोट नहीं थी,
वह आज की एलेक्सा नहीं थी
तब उसका नाम कुछ भी होता था।
उसे लाया जाता साधिकार,
फिर वह एलेक्सा बना दी गई।
तारीफ देखिए सदियों बाद जब
नयी एलेक्सा आई तो
वह भी स्त्रीलिंग है
और उसका निर्माता पुरुष।
आज की एलेक्सा तो बगावत भी कर सकती है,
कल की तो बोलना भी नहीं जानती थी, 
चुपचाप आदेश पूरा करती रहती।
आज भी हर दूसरे घर में 
दो दो एलेक्सा मिल जायेंगी
ये उनकी नियति है,
चाहे हाड़-माँस की हो या मशीन
उसे सिर्फ आदेश मानना है
बगैर नानुकुर किए 
ये एलेक्सा हर युग में रही है 
और रहेगी।
नारी का दूसरा अवतार एलेक्सा है।

 

12 टिप्‍पणियां:

अनीता सैनी ने कहा…

जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार(१०-१० -२०२२ ) को 'निर्माण हो रहा है मुश्किल '(चर्चा अंक-४५७७) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर

Sarita sail ने कहा…

बढियां सृजन

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

आभार, आती हूँ।

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

आभार सरिता।

रंजू भाटिया ने कहा…

वाह एलेक्सा 👌👍

Jigyasa Singh ने कहा…

सच एलेक्सा को एलेक्स भी कर सकते थे । पर वो इतना हुक्मनवाज न होता ।सटीक और गज़ब लिखा दीदी।

आलोक सिन्हा ने कहा…

अच्छी रचना है।

shikha varshney ने कहा…

अनूठी तुलना

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना

Sweta sinha ने कहा…

ओह्ह... विचारणीय रचना।
सादर।

Sudha Devrani ने कहा…

तारीफ देखिए सदियों बाद जब
नयी एलेक्सा आई तो
वह भी स्त्रीलिंग है
और उसका निर्माता पुरुष।
सच में आदेश का पालन करने वाली मशीन तक स्त्रीलिंग
विचारणीय सृजन
वाह!!!

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना