शनिवार, 21 जुलाई 2012

हाइकू !

 शिक्षा व्यापार
शिक्षण उगाही है
भविष्य काला .
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नील  गगन
शांत श्वेत  चाँद है
भू ज्वलित सी .
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नेता  हो  तुम
बहको मत आज
कल कैसा हो?
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वादे ही वादे
ढोल हों या ताशे
भूल जाओगे।
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रात अँधेरी
दिन भी काला काला
ख़ुशी कहाँ हो?
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बेटी जन्मी है 
बुझा दो सारे दिये 
रौशनी होगी।
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सड़क पर 
माँ बाप रहेंगे ही 
दिल तंग है।
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8 टिप्‍पणियां:

सदा ने कहा…

बेटी जन्मी है
बुझा दो सारे दिये
रौशनी होगी।
वाह ... इन पंक्तियों ने तो नि:शब्‍द कर दिया ... आभार

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत ही सटीक और सार्थक हाइकु

सादर

रश्मि प्रभा... ने कहा…

बेटी जन्मी है
बुझा दो सारे दिये
रौशनी होगी।... यह सच है , बिल्कुल चाँद सा

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सटीक हाइकु

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार के  चर्चा मंच  पर भी होगी!
सूचनार्थ!

सुशील ने कहा…

बहुत गहरे हैं
डूब सकते हैं!

बहुत खूब !!

वन्दना ने कहा…

सड़क पर
माँ बाप रहेंगे ही
दिल तंग है।

सटीक हाइकु

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत खूब ..