बुधवार, 23 मई 2012

हाइकू !

 निःशब्द हम 
 दुनियां की  रीत  से 
 जीना   मना है .

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लड़की होना 
अभिशाप  हो चुका 
वापस चलें .

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 बोझ क्यों बनो 
धरती के  ऊपर 
शर्म से मरो .

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राजनीति  में 
सब कुछ जायज 
गिरवी देश .

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 घर छोटा है 
काले धन के लिए 
विदेश चलें 

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 जो कुर्सी  मिली 
बौराने लगे लोग 
लूट मचा दी .

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जान सस्ती है 
कोई भी ले  रहा है
पैसा चाहिए .

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परिवार है 
बूढ़े बोझ ढो  रहे 
युवा बन्दूक . 

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6 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

गागर में सागर

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सभी हाइकु बहुत अच्छी ...

दिलबाग विर्क ने कहा…

आपकी पोस्ट 24/5/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा - 889:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

वन्दना ने कहा…

सभी हाइकू सार्थक्।

संजय भास्कर ने कहा…

.....बहुत बढ़िया हाइकु

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक अभिव्यक्ति!