शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

देश धर्म !




जिस धरती पर जीवन पाया,
पूर्णरूप से मानव बनकर,
सोच बढ़ी उन्नत मानव को
वायु, जल माटी लगी काटने

उड़कर कहीं और जाने की
इच्छा लेने लगी अंगडाई,
दूर कहीं पर जाकर बसने
की बात मन में उग आई

जननी, जनक, सहोदर छोड़े,
गालियाँ चौवारे रास आये,
दूर चमकती धरा मन को भाई,
लगी आग वो है समझ आई

चलते चलते दावानल देखी,
जलते हुए वृक्षों के ऊपर,
पक्षी को यूं ही बैठे देखा,
चौंक गया थी मन में जिज्ञासा

अचरज से पूछा उसने तब
पक्षी भाई ये कैसी बात?
जलता है ये वृक्ष धूधू कर
और जलते हैं इसके पात,
तुम क्यों संग जलते हो भाई,
जब पंख हों तुम्हारे पास

खग बोले तब शीश उठा कर --

जब हमने खाए फल इसके,
और बीट से साने इसके पात,
अब यही है हमारा धर्म भाई
जलें और मरें इसी के साथ

जब खग खग में है प्रेम वतन से
फिर मानव तू क्यों भाग रहा है?
अपनी ही धरती से गद्दारी करके
मानव तू क्यों नहीं जाग रहा है ?

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

क्या भूलूं क्या याद करूँ ?

जीवन के इस मुकाम पर
क्या भूलूं क्या याद करूँ?

कल की बात रही हो जैसे,
आँखों के बिखरे सपनों जैसे,
तैर रहे हैं सब मन दर्पण में,
लौटा दो ये किससे फरियाद करूँ?

समझ नहीं aआता है अब भी,
क्या भूलूं क्या याद करूँ?

मन में छिपा कर रख छोड़ा है,
यादों के तिनके तिनके को
नजर बचा कर झाँक लेते हैं,
क्यों नाहक कोई विवाद करूँ?

जीवन तो गुज़रा है झूले में,
क्या भूलूं क्या याद करूँ?

आँखों के सुंदर सपनों को
तुमने ही धुंआ धुंआ किया,
किससे पूछूं रास्ता इसका ,
फिर दुनियाँ से जेहाद करूँ?

हर याद है मील का पत्थर
क्या भूलूँ क्या याद करूँ?

यादों के कुछ पैबंद बचे हैं
कुछ उजले कुछ धुंधले से,
गीतों के टुकड़ों में लिखे थे
पर अब कैसा प्रतिवाद करूँ?

जीवन दोराहे पर खड़ा है

क्या भूलूँ क्या याद करूँ?

सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

सिर्फ अहसास !

प्यार वो अहसास है
जिसको सिर्फ और सिर्फ
दिल महसूस करता है,
फिर वो दिल
जरूरी तो नहीं कि
सिर्फ 
प्रेम करें जिससे उसका ही हो.
प्यार माँ की ममता में बसा है,
भाई भाई भी प्यार में बंधा है. 
प्यार बहन के स्नेह में बसा है,
प्यार तो 
 दोस्त की उस दोस्ती में भी निहित है 
जो हर सुख दुःख में साथ होता है.
फिर क्यों आज,
उस प्यार को बांधने के लिए
हदें बनायीं जा रही हैं.
क्यों इल्जाम उनके नाम जा रहा है? 
जो उम्र की उस दहलीज पर खड़े हैं
जिसे युग ने सदा 
संदेह के नजर से देखा है.
ये सिर्फ आत्मा से जुड़ा है,
दिल से रिश्ते तो बाद में बनते हैं.
वो कल टूट भी सकते हैं 
लेकिन 
वो प्यार जो सिर्फ अहसास है
कभी टूटता नहीं है,
दूर हों या पास 
मिलें या फिर बिखर जाएँ,
उस अहसास से मुक्त 
कभी नहीं होते हैं.
बस वही अहसास जो कभी 
मरता नहीं है, 
इसी लिए कहते हैं कि 
प्रेम अजर अमर है. 
हर युग में
हर काल में
हर देश में
हर मजहब में
अगर इंसान हैं तो
ये अहसास वही होता है
उसी रूप में पलता है.
रिश्तों का नाम से
इसको इल्जाम न दो.
अगर प्यार दोगे तो मिलेगा.
मुफ्त में तो कोई
भीख भी नहीं देता. 

बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

बदनसीबी !



जब बहुत पास से  
गुजरे तुम
तुम्हारी खुशबू 
मेरे चारों तरफ फैल गयी.
गहरी श्वास भरी
और अहसास तुम्हारा होते ही,
आवाज दी -- कहाँ हो तुम?
आवाज तो निकली 
लेकिन फिर वो 
टकरा के बादलों से
चारों तरफ  गूँजने लगी .
गूँजती रही
फिजां में बहुत देर तक
बस 
मिलने की घड़ी न आई
आँखों में 
आँसू लिए अफसोस के
जा बैठी खिड़की में
फिर
मायूस , खामोश मेरी आवाज
वापस मेरे पास आ गयी
तुमसे मिले बगैर
शायद मिलना नसीब में न था.

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

क्या कर रहे हैं आप?

बहुत आसान है कीचड़ औरों पर उछालना,
छींटे से अपने दामन को क्यों रंग  रहे हैं आप?

इंसानियत नहीं है  तोहमत लगाना किसी पर,
बेकुसूर इस तरह से  भी कब बन  रहे है आप? 

वे गुनाह किये हैं ये किस्मत की बात थी,
गुनाहगार बताकर ये क्या कर रहे हैं आप?

अंगुली तो उठी है बेकुसूरों पर भी,
अपनी तरफ अंगुलियाँ क्यों उठा  रहे हैं आप?

बहुत गम है दुनियाँ में रोने के लिए,
दूसरों को ग़मगीन  क्यों बना रहे हैं आप ?

लफ्जों के तीर जहरीले बहुत होते हैं,
दूसरों को घायल उनसे क्यों कर रहे हैं आप?