सोमवार, 4 मार्च 2013

हाईकू !

शपथ ले लो 
संघर्ष बंद न हो 
न्याय लेना है. 
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दृढ निश्चय 
मजबूत इरादे 
नारी ही होगी ।
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ज्योति दिए की 
अंधकार चीरेगी 
जग जागेगा .
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बोये तो कांटे 
उगे  न फूल तो है 
दोषी धरती?
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संस्कार दें 
अपने आँचल में 
युग बदलें .
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कोख नारी की 
शिक्षा दबंगों की हो 
दोषी कौन है? 
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11 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

शुभकामनायें-

vandana gupta ने कहा…

बोये तो कांटे
उगे न फूल तो है
दोषी धरती?

शानदार हाइकू

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर हाइकू!

MANU PRAKASH TYAGI ने कहा…

badhiya hikoo

Rajesh Kumari ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 5/3/13 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका स्वागत है|

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

दुखती रग!
उँगली रख दी ठीक किया,
समय लगेगा!

Asha Saxena ने कहा…

दुखती राग ------
बढ़िया हाइकू |

Rajendra Kumar ने कहा…

bahut hi sarthak haikoo.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बेहतरीन हाइकु

Kuldeep Sing ने कहा…

आप की ये खूबसूरत रचना शुकरवार यानी 8 मार्च की नई पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है...
आप भी इस हलचल में आकर इस की शोभा पढ़ाएं।
भूलना मत

htp://www.nayi-purani-halchal.blogspot.com
इस संदर्भ में आप के सुझावों का स्वागत है।

सूचनार्थ।

निहार रंजन ने कहा…

सुन्दर हाइकु.