गुरुवार, 22 नवंबर 2012

हाईकू

 निरंकुश वे 
छटपटाते हम 
हल कहाँ है?
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फांसी का फन्दा 
एक की गर्दन में 
बाकी को तो दें । 
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 गोद में कन्या 
दरवाजे बंद हैं 
जाए वो कहाँ? 
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घरेलू हिंसा 
हर घर में जिन्दा 
चीख सुनें तो .
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आधी आबादी 
आज भी आधी जिए 
पूरी  न होगी   .
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अहंकार है 
फिर विद्वता कहाँ? 
सोचो तो जरा.  
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 माथे चन्दन 
गले में धारे हार
पंडित बने .
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11 टिप्‍पणियां:

सदा ने कहा…

अहंकार है
फिर विद्वता कहाँ?
सोचो तो जरा.
बहुत ही बढिया हाईकू ... सभी एक से बढ़कर एक

nilesh mathur ने कहा…

सभी अपने आप मे बेहतरीन।

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत बढ़िया .... सामाजिक सरोकार से जुड़े हुये सभी हाइकु बेहतरीन

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत बढ़िया हाइकू!
इनकी धार बहुत पैनी है!

Rajesh Kumari ने कहा…

सभी हाइकु एक से बढ़कर एक बधाई आपको

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

दिखा रहे दर्पण
भले अनजान बने
फेरे रहो नयन .

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन हाईकू.......

Asha Saxena ने कहा…

कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया आपने |

Neelima ने कहा…

घरेलू हिंसा
हर घर में जिन्दा
चीख सुनें तो


बेहतरीन हाईकू

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

बहुत सटीक हाइकु