बुधवार, 21 दिसंबर 2016

ख़ामोशी !

खामोश
कभी कहता है कोई
खामोश
कभी रहता है कोई
फिर भी
जीवन में
इस खामोश का
अटूट रिश्ता है।
पता नहीं
जन्म से लेकर
अब तक
वो कितना बोली होगी ?
- उत्तर नहीं देते ,
- जबान नहीं लड़ाते
- क्रोध नहीं बढ़ाते
या
- जबान बंद रखो
किसके पर्याय है ?
ये एक
शासित के पर्याय है।
जो जन्म से मृत्यु तक
शासित रही ,
दलीलें उसके खिलाफ
 और सबूत भी बहुत है।
लेकिन
कितनी मुखर हुई?
अगर हुई भी तो
मर्यादाहीन कही गयी।
जब से आँखें खुली
पहले से ही
कानों में खामोश पड़ा।
उम्र के किस पड़ाव पर
वह बोलने की
अधिकारी हुई ?
पिता ,
भाई
पति या पुत्र
सभी ने अपने अधिकार में
रखा कर
खामोश रखा।
उसकी ख़ामोशी
उसकी कमजोरी न थी
वह दृढ थी
वह जीना चाहती थी
हर वो रिश्ता
जो उसे ईश्वर से मिले हैं
बिना कुछ खोये
वह अगर
मूक बधिर होती तो
जीवन बेहतर होता
न सुनती
न गुनती
और न आहत होती
वह सिर्फ मुस्कराती
सिर्फ मर्यादित होती
सिर्फ मर्यादित होती।

2 टिप्‍पणियां:

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 22-12-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2564 में दिया जाएगा
धन्यवाद

gurturgoth.com ने कहा…

वाह, अभिव्‍यक्‍त खामोशी