शनिवार, 25 जुलाई 2015

हाइकू !

आज`राजनीति पर कुछ हाइकू !

राजनीति में 
सब कुछ जायज 
स्याह सफेद !
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मत उछालो 
कीचड दूजे पर 
तुम भी थे। 
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सात पर्दों में 
छिपा अपराध भी 
खुला जरूर। 
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कितना मिले 
कितना समेट लें 
ख़त्म न हो जो। 
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लोकतंत्र में 
जुटी हुई भीड़ की 
क्षमता शून्य। 
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राजतन्त्र में 
चिपके सत्ता से वो 
वही लोकतंत्र। 
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