शुक्रवार, 19 जुलाई 2013

अमल तो करें !

रिश्ते हैं एक पौध
पलते है जो दिलों में 
प्यार का पानी दें,
हवा तो दिल देता है 
फिर देखो कैसे ?
हरे भरे होकर वे
जीवन महका देंगे

अकेले और सिर्फ 
अपने  की खातिर 
अपने सुख की खातिर 
जीना बहुत आसन है ,
सोच बदलो 
औरों के लिए भी 
जीकर देखो तो वे 
बहुत  कुछ  सिखा देंगे . .

पानी किसी भी पौध में दें  
जरूरी नहीं कि 
अपनी ही बगिया का  हो ,
फूल  खिलेंगे और  महकेंगे 
खुशबू बिखरेगी 
बिना भेद के होता कैसे 
गैरों  से प्यार दिखा देंगे .
 
.इतना छोटा नहीं 
इंसान से इंसान का रिश्ता 
चीरों जिगर को  
सबमें बस वही सब होगा 
देख कर जान लेना 
फर्क  है दिल और जिस्म में 
धर्म , जाति , गरीब और अमीर के 
इस सोच को पल में मिटा देंगे .

एक हैं सब धरती पर 
एक से जज्बात हैं ,
अगर सीखने का जज्बा है 
जानने की मर्जी है तो 
इंसान से इंसान को 
जोड़ें हम कैसे 
वे उस प्यार की  
ऐसी इबारत लिखा देंगे . 

 


5 टिप्‍पणियां:

कविता रावत ने कहा…

पानी किसी भी पौध में दें
जरूरी नहीं कि
अपनी ही बगिया का हो ,
फूल खिलेंगे और महकेंगे
खुशबू बिखरेगी
बिना भेद के होता कैसे
गैरों से प्यार दिखा देंगे .
...बहुत सुन्दर सुविचार .....काश की हम इंसान प्रकृति जैसे आचरण कर पाते ....

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुंदर और सटीक बात .... प्रेम दिलों को जोड़ देता है ।

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

यही समझ ले तो मानवता का कल्याण हो जाए !

निहार रंजन ने कहा…

शिक्षाप्रद शब्द.

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

अर्थपूर्ण बात कही