गुरुवार, 28 जून 2012

हाइकू !

बेटी बचाओ 
सृष्टि  बच जायेगी 
अभी वक़्त है।
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भीगा आँचल 
हिलोरती ममता 
हाथ बंधे हैं .
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झुकी पलकें 
शुष्क आँखों की लाली 
वही कहानी। 
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रुदन सुना 
भूख से रोते शिशु 
आहत माँ  है .
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चेत भी जाओ 
वक़्त अभी बाकी  है 
जीना चाहो तो .
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जीवन बीता 
परोपकार में ही 
रीते हाथ हैं।
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आत्मा खुश है 
फटेहाल जीते हैं 
पैमाना क्या हो ?
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प्राण वायु है 
कब तक चलेगी?
 स्रोत चाहिए .
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7 टिप्‍पणियां:

वन्दना ने कहा…

बेहद सशक्त हाइकू।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सार्थक हैं सबी हाइकू!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

रुदन सुना
भूख से रोते शिशु
आहत माँ है .

वाह ... सभी हाइकु बढ़िया हैं ...

Udan Tashtari ने कहा…

उत्ताम संदेशात्मक हाईकु..सार्थक लेखन!

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) ने कहा…

बहुत ही शानदार हायकूज़..

सदा ने कहा…

सार्थकता लिए सशक्‍त हाइकू ... आभार

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

अर्थपूर्ण हाइकू..