बुधवार, 26 नवंबर 2008

अभिव्यक्ति!

जो कुछ जिया
भावों से लिया
औ' अंकित किया
बंद पृष्ठों की धरोहर
किसने देखी, किसने सुनी।

दिशा मंच की
मुखर अभिव्यक्ति ही
हस्ताक्षर के नाम की
पहचान बन गई,
सबने सुनी सबने पढ़ी।

नहीं पता सराही गई
या फिर आलोचित हुई,
मौन रही या मुखरित हुई
छुआ मर्म या असफल रही
अंतर्वेदना मेरी हर किसी ने सुनी।

औरों की पीड़ा जीकर
शब्दों में ढाल दी
सबसे बाँट ली
कुछ तो दिया उनको ,
कुछ तो लिया उनसे.

धन्य मेरी अभिव्यक्ति हुई
एक प्रश्न बन
मजबूर कर गई मनों को
जो सबने देखी सबने सुनी।

2 टिप्‍पणियां:

तरूश्री शर्मा ने कहा…

औरों की पीड़ा जीकर
शब्दों में ढाल दी
सबसे बाँट ली
कुछ तो दिया उनको ,
कुछ तो लिया उनसे.

अच्छा लिखा है। साझे मन की बात। आज पहली बार आपको पढ़ने का अवसर मिला।

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

औरों की पीड़ा जीकर
शब्दों में ढाल दी
सबसे बाँट ली
कुछ तो दिया उनको ,
कुछ तो लिया उनसे.

बहुत सुंदर लफ्जों में ढाला है आपने .