गुरुवार, 11 सितंबर 2014

हाइकू !


नवरात्रि में
कन्या पूजन किया
फिर की हत्या .
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या देवि कहो
या फिर देखो उसे
भोग्या का रूप .
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पूजिता तो है
वह हर हाल में
जननी है वो.
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तुम जन्म दो
हम पालेंगे उसे
हमें दे देना।
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जिस  घर में
पसरा है अँधेरा
बेटी जन्मी है।
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3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक हायकु।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक हायकु।

Sanju ने कहा…

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई मेरी

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