गुरुवार, 11 अक्तूबर 2012

हाइकू

 राजनीति में
रसूख देखना है
गाड़ी को देखो
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धरा कहती
इंसान से रुक जा
अभी जीना है।
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रिश्तों में अभी
रहने दो गरमी
खून से जुड़ी ।
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सपने टूटे
टुकड़ों को सहेजा
आंसूं चू पड़े। 
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सपने मुझे 
देखने का हक था 
मर्जी उनकी। 
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बलात्कार में 
कलंक नारी पे है 
वे हैं निर्दोष। 
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नारी के लिए 
विवाह की मर्यादा 
शिरोधार्य है। 
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सात फेरे है 
सिर्फ नारी के लिए 
नर आजाद . 
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12 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

हाइकुओं की सुन्दर प्रस्तुति....! शुभसंध्या!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

वाह...बेजोड़

नीरज

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सटीक .... बहुत सुंदर हाइकु ...

रविकर ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

Arvind Jangid ने कहा…

सात फेरे है
सिर्फ नारी के लिए
नर आजाद . ....बहुत सुन्दर

ऋता शेखर मधु ने कहा…

सात फेरे है
सिर्फ नारी के लिए
नर आजाद .

बढ़िया...सभी हाइकु सटीक

ई. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

सभी के सभी हाइकू एक से बढ़कर एक | आभार |

नई पोस्ट:- ओ कलम !!

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बेहतरीन हाइकु....

वन्दना ने कहा…

बहुत शानदार हाइकू।

सदा ने कहा…

बेहद सशक्‍त लेखन

Dr. sandhya tiwari ने कहा…

बहुत सुंदर हाइकु ...

India Darpan ने कहा…

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

जयपुर न्यूज
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