बुधवार, 7 सितंबर 2011

रिश्तों की माप !

अभी तक
ये समझ नहीं आया
कैसे लोग
रिश्तों को लिबास की तरह
बदल लेते है ?


कुछ रिश्ते
जो खून में घुले होते हैं
माँ से जुड़े होते है
रगों में वे
खून को पानी में
बदल लेते हैं?


कहते हैं जिन्हें
वे दिल के रिश्ते हैं
समझ आते हैं
लेकिन फिर ऊब कर
उनसे भी
किसी और को
अजीज बना लेते हैं
और
उसी रिश्ते में
कैसे बदल लेते हैं?

ये रिश्ते हो चुके हैं
अब शतरंज के मोहरों की तरह
दूसरों की जगह पर
रखते हैं नजर
औ'
अपने खाने जरूरत पर
बदल लेते हैं?

एक की जगह लेने को
हर मोड पर
दो दो खड़े हैं
जरूरत पड़ी तो
चेहरे की रंगत को भी
बदल लेते हैं?

15 टिप्‍पणियां:

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

एकदम सही कहा है

बिल्कुल शतरंज की मोहरों की तरह?

Rajiv ने कहा…

"दूसरों की जगह पर
रखते हैं नजर
औ'
अपने खाने जरूरत पर
बदल लेते हैं?
"
दीदी ,प्रणाम.यह तो आप भी जानती हैं कि जब कोई मर जाता है तो उसका खून पानी हो जाता है.यही बात रिश्तों के भी साथ है,आजकल लोगों से पहले रिश्ते ही मर जाते है.इनकी उम्र काफी कम हो गई है.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

ये रिश्ते हो चुके हैं
अब शतरंज के मोहरों की तरह
दूसरों की जगह पर
रखते हैं नजर
औ'
अपने खाने जरूरत पर
बदल लेते हैं....

पर छुट्टियों के मध्य भी कुछ रिश्ते खींचते हैं अपनी तरफ .... जहाँ एहसास है , वहीँ रिश्ता है और वह नहीं बदलता

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

हाँ भाइ, आजकल रिश्ते सिर्फ स्वार्थ के लिए रह गए हैं , सही कहाँ खून पानी मौत के बाद होता था अब जब पानी हो जाये तो समझ लो कि रिश्ता मर गया

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

samvedansheel kavita

संजय भास्कर ने कहा…

ह्र्दय की गहराई से निकली अनुभूति रूपी सशक्त रचना

Udan Tashtari ने कहा…

कैसे लोग
रिश्तों को लिबास की तरह
बदल लेते है ?


-यही तो समझ के परे है...उम्दा रचना,

रचना ने कहा…

good one rekha

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बहुत ही अच्छी रचना रेखा जी...बधाई

नीरज

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

rishto ka aajkal yahi chaal-chalan hai.

वन्दना ने कहा…

सटीक विश्लेषण किया है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

रिश्ते जब तक निभ जाएँ ठीक है .. अच्छा विश्लेषण किया है .

shikha varshney ने कहा…

बदलते वक्त के बदलते रिश्ते.

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-631,चर्चाकार --- दिलबाग विर्क

anu ने कहा…

सही से हर रिश्ते को परिभाषित किया आपने