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बुधवार, 25 मई 2011

ख्वाहिश नहीं करते!

गर तुम्हें गुरेज है मुहब्बत में पहल करने से,
तो हम भी दुनियाँ के सामने नुमाइश नहीं करते

ये वो पाक जज्बा है पलता है रूह में भीतर ही,
मिल सका तो मुकद्दर की आजमाइश नहीं करते

छिपाकर भी मुहब्बत के अहसास नहीं मरा करते,
तुम चाहो तो फिर तुम्हारी ख्वाहिश नहीं करते

रूह मेरी है, अहसास भी मेरे है नियामत मेरे लिए ,
बहुत दिया है खुदा ने अब कोई फरमाइश नहीं करते

सोमवार, 4 अप्रैल 2011

इम्तिहान दिया है मैंने !

अपने हक में आये तेरे इस दर्द को ,
आहिस्ता-आहिस्ता पिया है मैंने।

जब न सहा गया तो भींच कर होंठों को ,
नाम लेकर तेरा हर पल जिया है मैंने।

किसने पूछा है कभी जिन्दगी में मुझसे ,
कौन से ज़ख्म पर कैसा पैबंद सिया है मैंने।


होंठों पर हंसी लेकर औ आँखों में नमी ,
दुनियाँ के कहने पर इम्तिहान दिया है मैंने।

दिख न जाए आँखों में तस्वीर तेरी,
भूल से भी तेरा नाम न लिया है मैंने।

अपने दर्द तो जी ही चुके हम अब तक ,
दोष भी तो कभी तुमको न दिया है मैंने।