गर तुम्हें गुरेज है मुहब्बत में पहल करने से,
तो हम भी दुनियाँ के सामने नुमाइश नहीं करते।
ये वो पाक जज्बा है पलता है रूह में भीतर ही,
मिल न सका तो मुकद्दर की आजमाइश नहीं करते।
छिपाकर भी मुहब्बत के अहसास नहीं मरा करते,
तुम न चाहो तो फिर तुम्हारी ख्वाहिश नहीं करते।
रूह मेरी है, अहसास भी मेरे है नियामत मेरे लिए ,
बहुत दिया है खुदा ने अब कोई फरमाइश नहीं करते।
तो हम भी दुनियाँ के सामने नुमाइश नहीं करते।
ये वो पाक जज्बा है पलता है रूह में भीतर ही,
मिल न सका तो मुकद्दर की आजमाइश नहीं करते।
छिपाकर भी मुहब्बत के अहसास नहीं मरा करते,
तुम न चाहो तो फिर तुम्हारी ख्वाहिश नहीं करते।
रूह मेरी है, अहसास भी मेरे है नियामत मेरे लिए ,
बहुत दिया है खुदा ने अब कोई फरमाइश नहीं करते।
