अपने को मैंने बहुत पहले ही पढ़ लिया है
तभी तो जिन्दगी को इस तरह गढ़ लिया है,
अब क्या सुनाएँ ए दोस्त दास्ताने जिन्दगी,
वक़्त के पहले ही खुद सूली पर चढ़ लिया है।
तभी तो जिन्दगी को इस तरह गढ़ लिया है,
अब क्या सुनाएँ ए दोस्त दास्ताने जिन्दगी,
वक़्त के पहले ही खुद सूली पर चढ़ लिया है।
* * * * * *
ये कामना ही मेरी भगवान से,
जियें जब तक जियें सम्मान से,
दूर ही रखे वो मुझे अभिमान से,
मूल्य प्रिय हों सभी को जान से।
जियें जब तक जियें सम्मान से,
दूर ही रखे वो मुझे अभिमान से,
मूल्य प्रिय हों सभी को जान से।
