hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

सोमवार, 20 जुलाई 2020

दर्द हवेली का !

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विरासतें थक जातीं हैं, पीढ़ियों तक चलते चलते, और फिर ढह जाती हैं, अकेले में पलते पलते । हर कोना हवेली का अब भरता है  सिसकियाँ , चिराग भी...
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रविवार, 19 जुलाई 2020

रिश्तों की कहानी !

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रिश्ते एक पौध पलते है जो दिलों में प्यार का पानी दें, हवा तो दिल देता है फिर देखो कैसे? हरे भरे हुए वे जीवन महका करेंगे। अकेले और सि...
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शनिवार, 4 जुलाई 2020

शहीदों से ...!

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वीरो तुम्हें कैसे दूँ श्रद्धांजलि ! सीमा पर शहीद होते तो फ़ख्र होता है । अभी तो गद्दारों ने अपने ही देश में, अपने अपराधों की फेहरिश्त ...
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रविवार, 21 जून 2020

जिंदगी रेत सी !

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आज जब मची हाहाकार और लगता है , कि हर एक जिंदगी रह गई है मुट्ठी भर रेत की तरह । बंद मुट्ठी में कितने कण शेष हैं अब नहीं पता है। न ...
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मंगलवार, 9 जून 2020

गुमनाम !

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वो संगतराश जिसे लोग पत्थर दे जाते थे कुछ अपने होते थे और कुछ पराये भी होते। वह उन्हें तराश कर ढाल देता एक आकार में, रास्ते के वे पत्थ...
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सोमवार, 1 जून 2020

खामोशी !

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बेटियों के उदास चेहरे अच्छे नहीं लगते माँ के कलेजे में हूक उठती है। फिर भी वो खामोशी से सह जाती हैं पूछने पर "कुछ नहीं माँ बेकार...
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सोमवार, 25 मई 2020

ये कैसा अन्याय ?

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हे विधाता ये काल चक्र कैसा है? धरती और आकाश सभी से तूने मृत्यु रची है। किसके किसके घर उजड़े हैं? किसके टूटे है परिवार? कौन धरा पर तड़प...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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