hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

बुधवार, 10 जून 2026

भावों का दरिया !

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बंद आँखें  दिखती बंद भले ही हों, मन की आँखें कब बंद हुई हैं ? भावों का दरिया,  अंर्त में  निर्बाध बहा है,  नहीं लिखा मसि से कागज़ पर,  अंकित ...
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चाह आसमान की !

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  पाकर फल अपने श्रम का,  होकर पुलकित अंतर्मन से, नज़रें जमाये हैं निज लक्ष्य पर ,  छूना चाह रहे आसमान। देख रहे कंटकाकीर्ण धरा को ,  पर्वत खड़े...

चाहत !

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 ये उम्र भी न  बदल देती है सब कुछ  कब एक कोंपल को  पेड़ की शाखाओं का बना के हिस्सा जीवन का बोझ बढ़ा देती है।  अपने ऊपर  बढ़ते हुए  बोझ को तो ढो...
सोमवार, 8 जून 2026

बोनसाई का असर!

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 बोनसाई संस्कृति  हर जगह जरूरत बन गई है भूल गए हैं कि, बोनसाई सिर्फ सर्वस्व नहीं, हमारे विकल्प होते हैं। वृक्ष जब तक जड़ों से जुड़े है, तो च...
शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

एक नदिया सी !

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  एक नदिया सी ! हाँ मैं जिंदगी हूँ, किसी की भी होऊं, एक अनचाही इबारत  जिसे लिखा किसी और ने है,  और कहलाई वो मेरी है। लिखना मैंने भी चाहा  ले...
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टाइम कैप्सूल

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                                                                   टाइम कैप्सूल                                 अक्सर उठाती हूँ कलम         ...
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गुरुवार, 19 मार्च 2026

दो शब्द!

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 दो शब्द !           अक्सर देखती हूं कि सोशल मीडिया पर कुछ मित्रों की शिकायत होती है कि लोग सुप्रभात, शुभ रात्रि भेजते रहते हैं और हमें इस ब...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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