hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

शुक्रवार, 25 अगस्त 2023

नई इबारतें !

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  नई इबारतें लिखते हैं  हम , नयी कलम से , और खोजते हैं दास्तान पुरानी।  जंग लगी कलमों की स्याही भी सूखने लगी हैं । कुछ नया , न...
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शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

तानों का विष!

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          इन तानों का विष कितना जहरीला है?       पीकर मनुज मरता नहीं घुल जाता है।           रोज रोज दें बस एक खुराक बहुत है,        एक दिन व...
मंगलवार, 6 जून 2023

पैमाना !

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 जीवन में पैमाना खुशियों का   अपना अपना होता है । यह भी वक्त तय करता है , और कभी कभी हालात भी । दुधमुँहे को छोड़ जब माँ जाती है । अपने काम पर...
शुक्रवार, 26 मई 2023

कल को जीना है!

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  सुनो मुझे कल को जीना है  कोई चलेगा क्या कल में? मत चलो कोई,  फिर भी मुझे वापस जीना है, गुजरे हुए जीवन के उन प्यारे लम्हों को, क्या गुजरा, ...
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रविवार, 29 जनवरी 2023

खोजते हैं!

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 कितना अजीब सोचते हैं ये दुनिया वाले, परिंदों को बेघर कर आशियाना खोजते हैं। बसा कर आसमान तक मंजिलों का जाल, अब वही तारों भरा आसमान खोजते हैं...
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सोमवार, 10 अक्टूबर 2022

गमज़दा घर !

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  गमज़दा घर ! उस मकान से कभी आतीं नहीं  ऐसी आवाजें जिनमें खुशियों की हो खनखनाहट। खामोश दर, खामोश दीवारें,  बंद बंद खिड़कियाँ, ओस से तर हुई छते...
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रविवार, 9 अक्टूबर 2022

एलेक्सा!

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एलेक्सा! हाँ वह एलेक्सा है, आज की नहीं बल्कि वह तो वर्षों से है। वह एलेक्सा पैदा नहीं हुई थी, माँ की मुनिया, बापू की दुलारी, विदा हुई जब इस ...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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