जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.
मंगलवार, 6 जून 2023
शुक्रवार, 26 मई 2023
रविवार, 29 जनवरी 2023
सोमवार, 10 अक्टूबर 2022
रविवार, 9 अक्टूबर 2022
सोमवार, 29 अगस्त 2022