hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

किसी के लिए!

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  किसी के लिए!   जीवन एक अग्नि परीक्षा शेष रहे थे ये पल जो कर्ज हैं मेरे ऊपर किस जन्म के कर्मों का भुगतान या फिर था देना पावना इस जन्म के रि...
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मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

दोहे!

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दोहे ! 1. बदरी छाई जगत में, विपदा की चहुँ ओर ।      रैना कटे न दिन कटे, कब होगी नव भोर ।। 2. माणिक माला कर गहे, नजर भरी मन मैल। कलयुग का य...
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शनिवार, 31 जनवरी 2026

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 खामोशी भी कुछ कहती हैं,  कभी आंखों से, कभी चेहरे के भावों से औ' कभी उतर कर कागजों पर। हां उसको पढ़ना  सबके वश की बात नहीं। करें भी अगर ...
बुधवार, 13 नवंबर 2024

समय की बात!

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 उम्र खर्च हो गयी बिना सोचे-समझे, बहुत पैसे कमाने के लिए। धनी आज बहुत हैं, रखने की जगह नहीं, बस चुप हो गया। वक़्त ही नहीं मिला संभालें, जैसे...
शनिवार, 2 नवंबर 2024

स्वयंभू !

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  स्वयंभू  बनने की होड़ में  सर्वनाश पर तुले हैं  सब कुछ मिटा कर, हम किसको दिखाएंगे अपने वर्चस्व? कौन करेगा हमारी जय जयकार? एक आम इंसान क्या ...
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मंगलवार, 15 अक्टूबर 2024

हारा हुआ वजूद!

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  #हारा हुआ वजूद! वह चल दिया , जब दुनिया से, कुछ तो रोये, लहू के आँसू दिल से बहे खारे आँख से। एक हारा हुआ इंसान था वो सब कुछ दे गया, जो अपने...
1 टिप्पणी:
मंगलवार, 3 सितंबर 2024

यादों का प्रवाह!

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यादें  बस एक प्रवाह होती हैं, बहते हुए समंदर में  जीवन के गुजर गए  वक्त की गवाह होती हैं।  एक आती है  तो  उसी से जुड़ी सैकड़ों  यादें एक सैलाब...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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