जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.
सोमवार, 23 फ़रवरी 2026
मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026
शनिवार, 31 जनवरी 2026
बुधवार, 13 नवंबर 2024
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