hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

सोमवार, 1 जुलाई 2024

क्या कहिए ?

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  हर अश्क ने लिखी एक अलग इबारत है,   इन अश्कों की जुबानी भी क्या कहिए ?   कुछ में बसी है कसक अनदेखे जख्मों की,  इस अहसास में छलके तो क्या कह...
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रविवार, 9 जून 2024

वक्त की पतंग

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 वक्त की पतंग! ये वक्त पतंग सा ऊँचे आकाश में, चढ़ता ही जा रहा हैं। डोर तो हाथ में है, फिर भी फिसलती ही जा रही है, कोई मायने नहीं, कि चर्खी कि...
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गुरुवार, 25 अप्रैल 2024

उनका ये जीवन!

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  उनका ये जीवन! उनके झुर्रीदार चेहरे पर  मुस्कान कभी जब देखी है , वो पल बन गये  जिंदगी के अनमोल पल । उन आँखों की चमक में छलक रही थी ममता , व...
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बुधवार, 24 अप्रैल 2024

आज के रावण !

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  आज के रावण ! युगों पहले  रावण ने एक पाप किया था, पराई नारी पर  प्रतिशोध के लिए हरण किया था।  फिर उसके  प्रायश्चित के लिए पूरे परिवार का सं...
शनिवार, 9 सितंबर 2023

तलाश!

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 तलाश! आज बहुत दिन बाद निकली हूँ खोज में कहीं देखे हैं किसी ने, मेरे शब्द खो गये, दूसरे शब्दों में हिरा गये कहीं। खोजा मन के हर कोने में, बा...
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शुक्रवार, 25 अगस्त 2023

नई इबारतें !

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  नई इबारतें लिखते हैं  हम , नयी कलम से , और खोजते हैं दास्तान पुरानी।  जंग लगी कलमों की स्याही भी सूखने लगी हैं । कुछ नया , न...
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शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

तानों का विष!

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          इन तानों का विष कितना जहरीला है?       पीकर मनुज मरता नहीं घुल जाता है।           रोज रोज दें बस एक खुराक बहुत है,        एक दिन व...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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