hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

सोमवार, 16 मई 2022

सदमा!

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 वो मेरी बहुत घनिष्ठ और आत्मीय  अचानक एक दिन खो बैठी अपने जीवन साथी को। अवाक् और हतप्रभ खामोश हो गई। जब पहुँची उसके सामने तो सदमे में घिरी  ...
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रविवार, 8 मई 2022

माँ !

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 माँ  क्या  एक इंसान भर होती है फिर क्यों लोग  सगी और सौतेली का ठप्पा लगा देते हैं। माँ  एक भाव है, जरूरी नहीं कि उसने हर बच्चे को जन्म दिया...
गुरुवार, 14 अप्रैल 2022

माँ!

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 माँ ! माँ  एक भाव , एक चरित्र में समाया  वो अहसास है  जो उम्र , लिंग या रिश्ते का मुहताज़ नहीं होता । ये जन्म से नहीं , हृदय से जुड़ा हुआ  वो...
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रविवार, 13 मार्च 2022

किसको दूँ ?

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 सोचती हूँ , जिंदगी किसके नाम करूँ, वे जो अकेले है, देख रहे है आशा से कोई तो बाँट दे सुख-दूख उनका,  कुछ पल उनको ही सौंप दूँ । काँप रहे हैं प...
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रविवार, 31 अक्टूबर 2021

दीपावली !

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 पाँच दिवस का पर्व मनायें  मन से सबकी कुशल मनायें। धन्वंतरि की पूजा करके हम माँगें आरोग्य का अटल आशीष। यम के नाम का दीप जलाकर अकाल मृत्यु से...
शनिवार, 11 सितंबर 2021

आस लिए बैठे हैं !

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  वक्त गुजरता जा रहा है तूफान की तरह तेजी से , हम पोटली थामे यादों की आज भी लिए बैठे हैं । दौड़ नहीं पाये संग संग उसके तो पीछे रह गये , थाम क...
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निस्पृह बनो !

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 मन स्थिर तो नहीं लेकर दायित्वों का बोझ  चलना तो धर्म कहा जाता है, सोचते हैं कि चल आज की परिधि में, समेट लें अपने को और चुपचाप चलो, पर ये आज...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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