जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.
रविवार, 31 अक्टूबर 2021
शनिवार, 11 सितंबर 2021
शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020
बुधवार, 28 अक्टूबर 2020
मंगलवार, 22 सितंबर 2020