hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

रविवार, 31 अक्टूबर 2021

दीपावली !

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 पाँच दिवस का पर्व मनायें  मन से सबकी कुशल मनायें। धन्वंतरि की पूजा करके हम माँगें आरोग्य का अटल आशीष। यम के नाम का दीप जलाकर अकाल मृत्यु से...
शनिवार, 11 सितंबर 2021

आस लिए बैठे हैं !

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  वक्त गुजरता जा रहा है तूफान की तरह तेजी से , हम पोटली थामे यादों की आज भी लिए बैठे हैं । दौड़ नहीं पाये संग संग उसके तो पीछे रह गये , थाम क...
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निस्पृह बनो !

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 मन स्थिर तो नहीं लेकर दायित्वों का बोझ  चलना तो धर्म कहा जाता है, सोचते हैं कि चल आज की परिधि में, समेट लें अपने को और चुपचाप चलो, पर ये आज...
शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

दीवार !

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 दीवारें खड़ी होती है , टूटती रहती हैं, चाहे जितनी ऊँची क्यों न हो ? जो बनी है वो नष्ट होगी । नाशवान तो मानव भी है , फिर भी  मुट्ठी जैसे दिल ...
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बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

हमसफर !

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  जिंदगी एक सफर है जो जीवन भर सतत चलता ही रहता है , और ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेता है। उसमें कितने सफर होते हैं ? कितने पड़ाव आते हैं ? और ...
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मंगलवार, 22 सितंबर 2020

ओ कृष्णा फिर आ जाओ!

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ओ कृष्णा तुम फिर आ जाओ धरती फिर त्रस्त है अब एक नहीं कई कृष्णा बन कर तुमको आना होगा। द्वापर में -- एक रची गयी महाभारत वो रची द्यूत ...
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सोमवार, 20 जुलाई 2020

दर्द हवेली का !

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विरासतें थक जातीं हैं, पीढ़ियों तक चलते चलते, और फिर ढह जाती हैं, अकेले में पलते पलते । हर कोना हवेली का अब भरता है  सिसकियाँ , चिराग भी...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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