जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.
बुधवार, 30 जनवरी 2019
मंगलवार, 29 मई 2018
शुक्रवार, 30 जून 2017
सोमवार, 23 जनवरी 2017
बुधवार, 21 दिसंबर 2016