hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

सोमवार, 12 अक्टूबर 2015

मेरी डायरियां !

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मेरी डायरियां  मेरी संवेदनाओं की  साक्षी , बचपन से अब तक की साथी , उम्र के साथ  उनकी उम्र नहीं  उनकी संख्या बढ़ती गयी।  इनकी कीमत  मे...
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शुक्रवार, 18 सितंबर 2015

रिश्तों की बगिया !

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हाँ  मैं रिश्ते बोती हूँ ,  धरती पर उन्हें  रोपकर  निश्छल प्यार , निस्वार्थ भाव, और अपनेपन की  खाद - पानी देकर  उनको पालती ...
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बुधवार, 16 सितंबर 2015

मैं हिन्दी हूँ !

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अपनी इस कविता को मैंने जानबूझ कर हिंदी दिवस पर नहीं डाला क्योंकि हिंदी हमारे लिए सिर्फ एक दिन अलख जगा कर चिल्लाने की चीज नहीं है।  उसके लिए...
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शनिवार, 25 जुलाई 2015

हाइकू !

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आज`राजनीति पर कुछ हाइकू ! राजनीति में  सब कुछ जायज  स्याह सफेद ! ******* मत उछालो  कीचड दूजे पर  तुम भी थे।  ******* सात पर्दों म...
मंगलवार, 23 जून 2015

हाइकू !

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कुछ हाइकू रिश्ते के नाम पर ---- रिश्तों में प्रेम  रिश्तों के बीच खून  कौन गहरा ? ***** रिश्तों को ढोना  बोझ से भी कठिन  उतार ही दो...
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सोमवार, 22 जून 2015

माँ से मायका !

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'म ' इस शब्द का कितना गहरा रिश्ता है ? हर इंसान से खासतौर पर हर औरत से। 'म' से 'मैं' ''म' से ...
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शुक्रवार, 19 जून 2015

वजन रिश्तों का !

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आज निकले मन की तराजू लेकर तौलने वजन रिश्तों का । हमने तो जीवन भर दिया सबको अंतर मन से वांछित , पर शाम तक लौटने के समय तक कोई मुझे व...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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