hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

पूर्व और पश्चिम !

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हम पश्चिम को   हसरत भरी  निगाहों से देखते रहे .  धीरे धीरे जीवन में  उसको उतारने लगे  पूरा नहीं तो  अधकचरा हे सही  उसे अपनाने ल...
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रविवार, 25 अगस्त 2013

हाइकू !

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 रोज पढ़ती हूँ कि मौत ने घर चिराग बुझा दिया , कोई लहरों में समां गया , कितनों की मांग सूनी हो गयी , असाध्य रोग से परेशान ने मौत को गले लगाया...
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सोमवार, 19 अगस्त 2013

दर्द अकेलेपन का !

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दर्द अकेलेपन का कभी किसी ने सहा है, सिर्फ इंसान ही नहीं सभी इस दंश को जीते हैं। इस धरा के शाश्वत सत्य के चलते अकेले आये हैं और ...
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शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

धरती का बोझ !

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विशाल और महान कब इंसान आकार  से हुआ है ? नहीं तो रावण का कभी पराभव न होता . ऊँचे कद से सिर्फ ऊपर का देख सकते हैं नीचे तो इंसान भी अ...
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सोमवार, 29 जुलाई 2013

क्या हो रहा है?

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चुनाव   अब धीरे धीरे  करीब आ रहे हैं और सब  अपनी छवि  के लिए  राजनैतिक समीकरण जिस तेजी से पूरे देश को उद्वेलित कर रहे हें लगता...
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सोमवार, 22 जुलाई 2013

तस्मै श्री गुरुवे नमः !

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गुरुवर तुमि नमन औ' वंदन बारम्बार , भाव सुमन अर्पित है करिए स्वीकार .  शिशुपन से जो थामा मुझको , पग पग पर ये ही डगर दिखाई .  काँ...
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शुक्रवार, 19 जुलाई 2013

अमल तो करें !

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रिश्ते हैं एक पौध पलते है जो दिलों में  प्यार का पानी दें , हवा तो दिल देता है  फिर देखो कैसे ? हरे भरे होकर वे जीवन म...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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