जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.
शुक्रवार, 30 अगस्त 2013
रविवार, 25 अगस्त 2013
सोमवार, 19 अगस्त 2013
शुक्रवार, 16 अगस्त 2013
सोमवार, 29 जुलाई 2013
सोमवार, 22 जुलाई 2013