जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.
गुरुवार, 14 मार्च 2013
बुधवार, 6 मार्च 2013
सोमवार, 4 मार्च 2013
शनिवार, 23 फ़रवरी 2013
गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013
सोमवार, 18 फ़रवरी 2013