hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

गुरुवार, 14 मार्च 2013

रुको सोचो और बढ़ो !

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घर की  इमारत तो बनेगी  तभी  जब  नींव के पत्थर  संस्कारों के गारे से  जोड़ जोड़ कर  उसे पुख्ता करने की बात   हमारे जेहन में होगी . गर...
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बुधवार, 6 मार्च 2013

दोषी कौन ?

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माँ  पालती है अपने गर्भ में सभी को एक तरह  फूलों की जगह उगे कांटे तो उसका दोषी कौन ? आँचल से लगाकर दूध पिलाया था सबको एक तरह  कोई बना म...
14 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 4 मार्च 2013

हाईकू !

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शपथ ले लो  संघर्ष बंद न हो  न्याय लेना है.  ******* दृढ निश्चय  मजबूत इरादे  नारी ही होगी । ******** ज्योति दिए की  अंधकार चीरेगी ...
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शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

हाईकू !

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रिश्तों में देखें ईमान भावना का ताउम्र रहें . ******** रिश्ते का घर प्रेम से ही जोडिए पुख्ता रहेगा . ****** कौन करेगा रिश्तों में ...
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गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

हैवानियत का खेल !

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बम के धमाके  चीखें, खून और लाशें  कुछ पल पहले  वह जिन्दगी के लिए  खरीद रहे थे , फल , कपडे और जीने के लिए और कुछ  और एक वो पल  जिसने ...
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सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

ओ गांधारी जागो !

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ओ गांधारी जागो ! जानबूझ कर  मत बाँधो आंँखों पर पट्टी, सच को न देखने का  बहाना सब खोज रहे हैं,  सिर्फ गला फाड़ कर चीखने से    आँख बं...
18 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

रिश्तों की नींव!

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जोड़ते है  जब रिश्तों को  उसमें खून नहीं  प्यार का सीमेंट चाहिए . बहुत पुख्ता होते हैं  वे रिश्ते जिन्दगी में  गर उनमें न हो  मिली रे...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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