hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

शनिवार, 22 दिसंबर 2012

मैं ... मेरी चाह ...!

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उन सब की  फाँसी  जिन लोगों ने  कर तो दी  मेरी अस्मत तार तार  मेरी पीडाओं को  मेरी  इस त्रासदी को  मेरे टुकडे टुकडे जिस्म को  फिर से ...
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शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

आप ?

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कीचड़ में पत्थर फ़ेंक कर भी  खुद को पाक कह रहे हैं आप ? दूसरों पर अंगुली उठाये हुए देखा  , तो फिर निर्दोष भी कब रहे हैं आप ? बहुत आसन ह...
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सोमवार, 3 दिसंबर 2012

हाईकू !

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ज्ञानशून्य है  आरक्षण की माया  खुद देख लें। ******** अब मिलती  मानवता धरा पे  दम तोड़ती . ******** आरक्षण दे  संविधान है ...
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गुरुवार, 22 नवंबर 2012

हाईकू

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 निरंकुश वे  छटपटाते हम  हल कहाँ है? ******** फांसी का फन्दा  एक की गर्दन में  बाकी को तो दें ।  ********  गोद में कन्या  ...
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शनिवार, 3 नवंबर 2012

ईश्वर बनाम माँ !

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माँ ओ मेरी माँ  कल मैंने देखा  एक सपना  तब जाना कि  तेरा ये रूप क्यों  मुझे ईश्वर सा लगता है . सपने में  ईश्वर आ...
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शनिवार, 27 अक्टूबर 2012

श्मशान तक !

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    हर इंसान वाकिफ  है जिन्दगी की हकीकत से         जिन्दगी के रास्ते आखिर श्मशान तक जाते हैं . आता तो है हर इंसान इस  दुनियां एक तर...
15 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

हाइकू

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 राजनीति में रसूख देखना है गाड़ी को देखो ******* धरा कहती इंसान से रुक जा अभी जीना है। ******* रिश्तों में अभी रहने दो गर...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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