hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

ये भावी नेता !

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क्यों बदल देते हें लोग अपनी आस्था को कपड़ों की तरह , जहाँ आंच आती दिखी अपने दमकते भविष्य पर धीरे से निकल लिए और शामिल हो ...
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रविवार, 29 जनवरी 2012

दीवार !

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दीवार तो एक ही होती है , चाहे वह ईंट और गारे की हो या फिर अनदेखी दिल के बीच । ईंट गारे की दीवार फिर भी लांघ कर जा सकते ...
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सोमवार, 16 जनवरी 2012

आशा से .....!Aruna

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ये दिया जलाये मकान हूँ, स्नेह भरा था जीवन का, ये जीवन दीप भी अब तक कब तक जल सकता है ? अब आओ सहयोगो तुम, ये दीप न...
15 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 9 जनवरी 2012

तन्हां नहीं होता!

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जो जीता किताबों में वो कभी तन्हा नहीं होता। किताबों की इबारत होती है जुबान पर, किरदारों में खोजते हें खुद को, फिर करके मंथन ऐसा नहीं ऐसा? खु...
14 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 7 जनवरी 2012

एक शिकायत !

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शिकायत करूँ क्या बहुत अपनों से, गम में हमारे वे शरीक ही कहाँ थे? खोजती रही आँखें कई मर्तबा दर पर, मायूस ही रही तुम खड़े ही कहाँ थे? तुमसे अच्...
7 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 2 जनवरी 2012

हर दिन नव वर्ष !

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नव वर्ष की रात की चलती सर्द हवाएं , सर्द न कर सकीं उनके फन और हौसलों को, लोग लवरेज जोश भरे इरादों से नाचे रात भर , उनके हाथ चलते रहे अपने अप...
8 टिप्‍पणियां:

नव वर्ष २०१2 !

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स्वागत नव वर्ष का ह्रदय से करते है हम, हर किरण दिवस की मन का श्रृंगार करे। जो नहीं मिला हमें विगत वर्ष उसे भूलकर अब , कुछ नया...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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