hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

मंगलवार, 20 सितंबर 2011

एक वर्ष और!

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आज तीन वर्ष पूर्ण हुए मेरी ब्लोगिंग में आये हुए । जब ब्लॉग बनाया था तो इसके बारे में कुछ भी जानती थी न एडिटिंग और ...
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सोमवार, 19 सितंबर 2011

कहीं ये तो नहीं?

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जीवन के आकाश में घिरी ये घटायें न छंट ती हें न बरसती हें , इनका गहन अन्धकार दिन को भी रात बना देता है । निराशा का जनक ब...
10 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 10 सितंबर 2011

दान !

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एक पंडाल में प्रवचन चल रहा था - jeevan अर्जन और विसर्जन दोनों का ह़ी नाम है यदि अर्जित किया है तो उसे किसी न किसी रूप में विसर्जित अवश्य कर...
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बुधवार, 7 सितंबर 2011

रिश्तों की माप !

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अभी तक ये समझ नहीं आया कैसे लोग रिश्तों को लिबास की तरह बदल लेते है ? कुछ रिश्ते जो खून में घुले होते हैं माँ से जुड़े होते है रगों में वे खू...
15 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 20 अगस्त 2011

अन्ना की आंधी !

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आज फिर आज़ादी जैसा जूनून भरा है मन में , ऐसा ही जोश छलक छलक रहा है जन जन में। नहीं खबर है उनको इसकी कि दिन है या रात , ...
7 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 17 अगस्त 2011

दोहरा सत्य !

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वो दर्द का एक सैलाब दिल में लिए, यूं ही सबकी ख़ुशी में मुस्कराती रही, आँखों में बसी उदासी औ' नमी को , झुका कर नजरें दुनियाँ से छुपात...
14 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 11 अगस्त 2011

मेरी कलम से !

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मेरी कलम मेरी सबसे बड़ी हमराज है। कितनी प्यारी सी सहेली है, बताऊं कैसे ? इससे खास शायद कोई नहीं, ये जानती है मेरे ग़मो...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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