hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

सोमवार, 17 जनवरी 2011

मानव और मानवता

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मानव औ' मानवता सिर्फ भाषण में अच्छे लगते हैं. या फिर  किताबों की नीति कथा के उपदेशों में ही सोहते हैं. अखबारों की सुर्ख़ियों तक ...
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शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

खोया अतीत !

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हम साथ ही चले थे, रहना भी साथ ही था, मगर  वक्त की बेरहम आंधी  कहाँ से कहाँ ले गयी? हम फिर चल दिए  नए रास्ते पर  जो नियति ने ह...
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शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

नव वर्ष के संकल्प !

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बीते दशकों इसी तरह नव वर्ष के आते जाते ,  इस वर्ष कुछ ऐसा मनाएं, संकल्पों के दशक बना लें. दीप ऐसा एक मन में जला लें, कलुष मि...
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२३ मार्च पर शहीदों को नमन !

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मुझे लिखते देख मेरी सहेली बोली - क्या कर rahi ho? उसे bataya ki aaj शहीद दिवस है कुछ लिखना चाह रही हूँ। तुरंत वह बोली - साल में वही दिन तो आ...
बुधवार, 8 दिसंबर 2010

अमन के दुश्मन !

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पौध अमन की इस बगिया में हम रोपने में लगे हैं, सबने मिल कर हजारों पौध तैयार कीं. कोई जानवर इसको रौंदे न - खाने की जुर्रत न करे - अपन...
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सोमवार, 6 दिसंबर 2010

तार तार शब्दों की गरिमा !

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पूजा, दिव्या, वंदना, अर्चना, नमिता तार तार कर दिया इन शब्दों की गरिमा को, खून के आंसूं रो रहे हैं ये मानव जीवन के नमित  शब्द . अर...
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गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

अनुत्तरित प्रश्न !

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उस वक्त बीच राह में तुमने साथ छोड़ा था, और मैं बात जोहती रही सालों गुजर गए फिर हार कर अपनी राहें खुदबखुद तलाश कर हिम्मत बटोर...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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