hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

बुधवार, 30 दिसंबर 2009

नववर्ष तुम्हें शत शत शुभ हो!

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नववर्ष तुम्हें शत शत शुभ हो! नव प्रात अरुणिमा से बिखरे खुशियाँ और खुशहाली। प्रफुल्लित मन से रखो पग नव दिवस में। जगमगाते सूर्य की किरणे...
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मंगलवार, 29 दिसंबर 2009

सिर्फ आज जिया है!

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विदा गुजरे साल को सब दे रहे हैं। गुजर रहे हैं साल-दर-साल सिर्फ रात औ' दिन के चक्र में न कल देखा, न देखेंगे। सिर्फ आज औ' आज अपना है। ...
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सोमवार, 14 दिसंबर 2009

जीवन की संध्या इतनी दुरूह क्यों?

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बालकनी में बैठे दादा, नीचे रेंग रहे लोगों को देख रहे हैं हसरत से, ये अब तकाजा हर इन्सान का , आज उनका तो कल होगा हमारा। वक्त के साथ क...
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गुरुवार, 10 दिसंबर 2009

मानवाधिकार दिवस - किसके लिए ?

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कौन से मानव है? जो हकदार है इन मानवाधिकारों के। उससे पहले की मानव को अधिकार मिले हर्ता पहले आ जाते हैं, अपने साम-दाम-दण्ड-भेद सब अपना कर अपन...
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गुरुवार, 3 दिसंबर 2009

विकलांगों को समर्पित ये प्रशस्ति!

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शायद क्रूरता है ये उनके भाग्य की, मानव तो बनाया किंतु पूर्णता नहीं दी । ...
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रविवार, 29 नवंबर 2009

जीव- आत्मा-परमात्मा !

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क्यों जीव ही जीव का हत्यारा है? कभी ईश्वर, खुदा या पैगम्बर का नाम लेकर उन जीवों को हलाल कर दिया। कभी आड़ लेकर धर्म की नर संहार कर दिया। अपने...
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गुरुवार, 26 नवंबर 2009

शत शत नमन!

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शत शत नमन , वीरो तुम्हें शत शत नमन जीवन न्यौछावर मात्री भू पर पर कितने जीवन बचा लिए हौसले दुश्मनों के पस्त हैं सर उठाते है बार बार मगर तुम...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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