hindigen

जीवन में बिखरे धूप के टुकड़े और बादल कि छाँव के तले खुली और बंद आँखों से बहुत कुछ देखा , अंतर के पटल पर कुछ अंकित हो गया और फिर वही शब्दों में ढल कर कागज़ के पन्नों पर. हर शब्द भोगे हुए यथार्थ कीकहानी का अंश है फिर वह अपना , उनका और सबका ही यथार्थ एक कविता में रच बस गया.

शुक्रवार, 6 मार्च 2009

होली आई रे!

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होली के रंग, खेलें अपनों के संग पी के मस्ती की भंग , नाचें ले के तरंग कर लो सबको तुम तंग , यह है होली का ढंग . डालो रे रंग ही रंग ,...
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सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

सफर

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जीवन का यह सफर बस एक परिक्रमा है, बार-बार शुरू होती है, सुबह से शाम तक वही गलियाँ औ' रास्ते , छाँव भरे पल कब गुजरे छाँव में पता नहीं च...
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सोमवार, 22 दिसंबर 2008

कामना ! नव वर्ष

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नव वर्ष नव मुकुलित कलियों सा खिलने को तैयार। इससे पहले विधाता तू इतना कर दे -- सद्बुद्धि, सद्चित्त , सद्भावना उन्हें दे दे, जिन्हें इसकी जर...
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विडंबना

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आज अकेले, बीमार, बेवश चुपचाप पड़ी पर छत पर लटके पंखे के हर कोने को देख रही है। सारी बत्तियां बुझ चुकी है कब की, अब तो बंद हो चुकी है, रसोई मे...
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मंगलवार, 2 दिसंबर 2008

प्रार्थना जो सुन ली गई!

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*मैंने भगवान् से माँगी शक्ति उसने मुझे दी कठिनाइयाँ हिम्मत बढ़ाने के लिए। *मैंने भगवान् से माँगी बुद्धि उसने मुझ...
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गुरुवार, 27 नवंबर 2008

गुमनामी के अँधेरे!

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गोली, बारूद और धमाकों की राजनीति कराने वालो गुमनाम रहने वालो कहते हो की हम धर्म के लिए लड़ रहे हैं ladai। मत सताओ हमारे वर्ग को अपने वर्ग क...
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बुधवार, 26 नवंबर 2008

अभिव्यक्ति!

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जो कुछ जिया भावों से लिया औ' अंकित किया बंद पृष्ठों की धरोहर किसने देखी, किसने सुनी। दिशा मंच की मुखर अभिव्यक्ति ही हस्ताक्षर के नाम की...
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
कानपुर , UP, India
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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