बुधवार, 25 जुलाई 2012

मत कीजिये !

रास्ते के पत्थर को अनदेखा न कीजिये 
ऐसा न हो की उससे ठोकर लगे कभी।

घर में बैठे दुश्मन पर भरोसा न कीजिए,
ऐसा न हो की पीछे से वो वार करे कभी।

झूठी तारीफ करने का कभी मौका न  दीजिए, 
ऐसा न हो कि  दुश्मनों का निशाना बने कभी।

भरोसा भी  जिन्दगी में कभी ख़त्म न कीजिये,
किस पल किस्मत बदले औ सिकंदर बने कभी। 

खुद पे हंसने वालों को कभी निराश न कीजिये,
उनकी हंसी बने जोश और शुक्रिया करे कभी।

इंसान हो तो किसी से भी नफरत न  कीजिये,
बसता है खुदा उन्हीं  में मिल जाएगा कभी।
,

11 टिप्‍पणियां:

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

'घर में बैठे दुश्मन पर भरोसा न कीजिए,
ऐसा न हो की पीछे से वो वार करे कभी'
- यहाँ तो घर में बसा-बसा कर दुश्मनों की ख़ातिर की जाती है ,वार सहने के बाद भी !
किसे अक्ल दे रही हैं, रेखा जी ?

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूब सारी सीख देती रचना ...

S.M Masum ने कहा…

इंसान हो तो किसी से भी नफरत न कीजिये,
बसता है खुदा उन्हीं में मिल जाएगा कभी।
.
बहुत खूब

सदा ने कहा…

वाह ... बहुत खूब कहा है आपने.. .आभार

Sunil Kumar ने कहा…

सुंदर अतिसुन्दर सारगर्भित रचना , बधाई

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

बहुत खूब

shikha varshney ने कहा…

अच्छी नसीहतें हैं पर अमल कौन करे.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

झूठी तारीफ करने का कभी मौका न दीजिए,
ऐसा न हो कि दुश्मनों का निशाना बने कभी।saari seekh sahi hai

Udan Tashtari ने कहा…

उम्दा नसीहतें...उम्दा रचना...

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

sach mein bahut badiya rachna

नीरज गोस्वामी ने कहा…

रेखा जी ,आपके ब्लॉग पर देरी से आने के लिए पहले तो क्षमा चाहता हूँ. कुछ ऐसी व्यस्तताएं रहीं के मुझे ब्लॉग जगत से दूर रहना पड़ा...अब इस हर्जाने की भरपाई आपकी सभी पुरानी रचनाएँ पढ़ कर करूँगा....कमेन्ट भले सब पर न कर पाऊं लेकिन पढूंगा जरूर

इंसान हो तो किसी से भी नफरत न कीजिये,
बसता है खुदा उन्हीं में मिल जाएगा कभी।

वाह अद्भुत रचना है आपकी...जीवन का सार पिरोया है आपने...बधाई

नीरज